ब्रेकिंग
विकास कार्यों की सौगात: महापौर ने तीन वार्डों में सड़क, नाली और पुलिया निर्माण कार्यों का किया भूमिप... अब कम होगा ईंधन खर्च! भारत में आया E85 फ्लेक्स फ्यूल, जेब पर पड़ेगा कम बोझ सिर्फ 15 साल की उम्र में टीम इंडिया का टिकट, वैभव सूर्यवंशी ने रचा नया कीर्तिमान केशकाल घाट फोरलेन बायपास निर्माण में ढिलाई पर नाराज हुए अरुण साव, समय पर काम पूरा करने के निर्देश महंगाई भत्ते की मांग को लेकर 10 जून को प्रदर्शन, कर्मचारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचने की अपील मंत्री गजेन्द्र यादव से मिलीं महिला मोर्चा की नवनियुक्त पदाधिकारी, जताया आभार दुर्ग में 27 लाख की हार्वेस्टर धोखाधड़ी का खुलासा, अधिकृत डीलर गिरफ्तार दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्यवाही रू 15 टन से अधिक कोयला जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत निगम का जागरूकता अभियान तेज वॉल पेंटिंग और जनसहभागिता से सुंदर बन ... जिला स्काउट्स एवं गाइड्स ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया
छत्तीसगढ़

तेजतर्रार अधिकारी अरुण देव गौतम बने छत्तीसगढ़ के नए DGP, कई जिलों में संभाल चुके हैं कमान

छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के नाम से पर्दा उठ गया है. अरुण देव गौतम छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी बनाए गए हैं, उनके नाम का ऐलान हो गया है. वह शुरू से ही इस रेस में आगे थे, अरुण देव गौतम की पहचान तेजतर्रार अधिकारी के तौर पर होती है. राज्य सरकार की तरफ से उनका नाम  UPSC को भेजा गया था. वह अशोक जुनेजा की जगह लेंगे.

छत्तीसगढ़ के डीजीपी रहे अशोक जुनेजा का कार्यकाल सोमवार को खत्म हो गया है, ऐसे में नए डीजीपी के तौर सीनियर अधिकारी पवनदेव और अरुणदेव का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा था, जिसमें अरुणदेव गौतम को जिम्मेदारी मिली है. फिलहाल वह डीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

वहीं अरुणदेव गौतम भी 1992 छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस हैं, जो छत्तीसगढ़ के कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वह सचिव गृह विभाग और ओएसडी भी रह चुके हैं. फिलहाल वह छत्तीसगढ़ में डीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

दरअसल, 2006 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह निर्देश दिया गया था कि राज्यों में डीजीपी नियुक्तियों के लिए राज्य सरकारें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तरफ से सूचीबद्ध तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से ही अपने डीजीपी का चयन करें, ऐसे में पहले ही इन अधिकारियों को पैनल बनाए जाते हैं.

वहीं जहां डीजीपी के पद पर चयनित अधिकारी को अपने रिटायरमेंट की तारीख की न सोचकर कम से कम दो साल का कार्यकाल पूरा करना चाहिए. इ

सके अलावा डीजीपी पद के लिए 30 साल की सेवा जरूरी है, केवल स्पेशल केस में ही भारत सरकार किसी अधिकारी को डीजीपी बनाने के निर्देश दे सकती है. क्योंकि छोटे राज्यों में आईपीएस का कैडर छोटा होता है, इसलिए इसे 30 की जगह 25 कर दिया गया है, लेकिन बड़े राज्यों में 30 साल ही जरुरी रहता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button